Moral Stories In Hindi For Class 5 || कक्षा 5 के लिए हिन्दी कहानियां

नमस्कार दोस्तों मैं इस पोस्ट Moral Stories In Hindi For Class 5 मे आप लोगों को बहुत ही बढ़िया छोटी परंतु बहुत मजेदार कहानियाँ लिख रहा हूँ जिसे पढ़कर आप लोगो मनोरंजन भी होगा और शिक्षा भी मिलेगी |

Moral Stories In Hindi For Class 5

Moral Srories In Hindi For Class 5

Moral Stories In Hindi For Class 5 ||शार्क और मछली

जापान मे मछलियाँ  उनकी डाइट का एक मेजर हिस्सा होती है |

और यह जितनी ताजी होती है जितनी फ्रेश होती है लोग उसे उतना ही पसंद करते हैं |

लेकिन जापान के शिकारियों के  पास इतनी मछलियाँ  होती नहीं कि उनसे लोगों के डिमांड पूरी की जा सके |

तो ऐसा रिजल्ट जो फिशरमैन होते हैं ना वह दूर समुद्र में जाकर मछलियनों  को पकड़ते हैं|

आपको पता है जब इन मछलियनों  को पकड़ने की शुरुआत हुई ना तो मछली पकड़ने वालों  के

सामने यानी मछुआरों के सामने बहुत प्रॉब्लम सी आ गई |

वह जितनी दूर मछलियों  को पकड़ने जाते उन्हें लौटने में वापस आने में उतना ही

ज्यादा टाइम लग जाता और मछलियां बाजार   तक पहुंचने मे बा सी हो जाती |

और फिर उन्हें कोई खरीदना नहीं चाहता था अगर हम पैसा दे रहे हैं तो हमें फ्रेश से फ्रेश मछली

मिले इस प्रॉब्लम से निपटने के लिए मछुआरों ने अपने बोर्ड पर फ्रीजर लगवा दिए |

वह मछलियां पकड़ते और उसे फ्रीजर में डाल देते इस तरह से वह और भी देर तक मछलियां पकड़ सकते थे

और उसे बाजार तक पहुंचा सकते थे इसमें भी एक प्रॉब्लम आ गई जापानी

फ्रोजन फिशेज और फ्रेश फिशेज में आसानी से डिफरेंट महसूस कर लेते थे |

और फ्रोजन फिशेज को खरीदने से कतराते उन्हें तो किसी भी कीमत पर किसी भी कास्ट

पर ताजी मछलियाँ  ही चाहिए होती इस समस्या से निपटने के लिए मछुआरों ने फिर

कुछ आईडिया लगाया और इस बार एक बहुत ही स्मार्ट सा तरीका उन्होंने निकाला |

शिकारियो का दिमाग | Moral Stories In Hindi For Class 5

उन्होंने अपनी बड़ी-बड़ी फिश टैंक नाव  पर  बना लिए और अब वह मछलियां पकड़ते और

उन्हें पानी से भरे  टैंक  में डाल देते टैंक में डालने के बाद कुछ देर तो मछलियां इधर-उधर

भागती पर जगह कम होने के कारण वह जल्दी एक जगह रुक  जाती थी तो भले वह सांस

तो ले रही होती थी पर उनमें वह बात नहीं होती थी जो की समुद्र वाली ताजी मछलियों में हुआ करती थी|

तो इतना कुछ करने के बाद भी प्रॉब्लम जैसे की तैसी बनी हुई थी अब मछुआरे क्या करते

अब वह कौन सा उपाय लगाते कि लोगों तक मछलियाँ ताजी  पहुंच जाती 

क्योंकि उन्होंने सब कुछ करके देख लिया था |

इस बार उन्होंने सोचा कि अब कुछ नया नहीं करेंगे ऑलरेडी जो हम कर रहे हैं उसी में कुछ ना

कुछ चेंज करते हैं इस बार हर टैंक में उन्होंने छोटी सी शार्क मछली को डाल दिया

शार्क  कुछ मछलियों को जरुर खा जाती

पर ज्यादातर मछलियां बिल्कुल ताजी पहुंचती एकदम फ्रेश अब आप बताइए ऐसा क्यों होता है |

ऐसा इसलिए होता क्योंकि शार्क मछलियों को खाने के लिये उनके पीछे दौड़ती और जान बचाने के

लिए वह मछलियां हमेशा अलर्ट और चौकन्ना  रहती इसलिए कुछ दिनों तक टैंक में पड़े रहने के

बावजूद काफी एक्टिव रहती थी और उन्हें ताजा पन बना रहता था |

आज बहुत से लोगों की जिंदगी टैंक में पड़ी उन मछलियों की तरह हो गई है जिन्हें जगाने के लिए

कोई शार्क  आसपास उपलब्ध नहीं है अनफॉर्चूनेटली आपके साथ ऐसा ही है

आपको भी अपनी लाइफ में नए चैलेंज एक्सेप्ट करने चाहिए ना उससे कुछ अलग करना होगा

और एक बार जिंदगी में यह जो ट्रेन है ना यह नयापन अगर यह आ जाए |

Moral Stories In Hindi For Class 5

कहानी 2 इंसानियत दूसरे लोगों की भलाई 

एक अमीर आदमी ने एक सुंदर सा मंदिर बनवाया मंदिर में भगवान की पूजा करने के लिए

पुजारी रखा गया और खर्च के लिए बहुत सारी जमीन खेत बगीचे यह सब मंदिर के नाम कर दिए गए |

मतलब उस अमीर इंसान ने ऐसा अरेंजमेंट किया था कि जो भूखे दिन दुखिया और  साधु संत आए वह

वहां दो-चार दिन ठहर सकें |

और उनको खाने के लिए भगवान का प्रसाद मंदिर मे मिल जाया करें अब उन्हें ऐसा व्यक्ति ढूंढना था

जो मंदिर के खजाने को मैनेज कर सके और सारे कामों को ठीक-ठाक चलाता रहे |

बहुत से लोग उस अमीर व्यक्ति के पास आए वह लोग जानते थे कि अगर मंदिर का मैनेजमेंट का काम

मिल जाएगा तो सैलरी बहुत अच्छी मिलेगी लेकिन उस अमीर इंसान ने सबको लौटा दिया वह सबसे

कहता मुझे एक अच्छा इंसान चाहिए तो उसे मैं अपने आप ढूंढ लूंगा

बहुत से लोग मन ही मन में उस अमीर व्यक्ति को बहुत गालियां देते थे कहते यह तो  पागल हो

गया लोग खुद आते हैं इसके पास चलकर लेकिन इसे कोई पसंद ही नहीं आता |

जब मंदिर के द्वार खुलते और लोग भगवान के दर्शनों के लिए आने लगते तब वह अमीर इंसान

अपने मकान की छत पर बैठकर मंदिर में आने जाने वालों को चुपचाप देखा करता था |

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एक दिन एक व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने आया उसके कपड़े मैले  फटे हुए थे वह बहुत पढ़ा लिखा भी

नहीं जान पड़ता था लेकिन जब वह भगवान के दर्शन करने जाने लगा

तब उस अमीर इंसान ने उसे अपने पास बुलाया और कहा क्या आप इस मंदिर की मैनेजमेंट संभालने

का काम स्वीकार करेंगे इस पर वह व्यक्ति बहुत हैरानी से बोलता है |

मैं तो बहुत पढ़ा लिखा नहीं हूं इतने बड़े मंदिर का मैनेजमेंट मैं कैसे कर सकता हूं इस पर वह अमीर

इंसान बोलता है मैं तो एक अच्छे इंसान को इस मंदिर का मैनेजर बनना चाहता हूं मैं जानता हूं आप

वह अच्छे इंसान है कैसे वह अमीर इंसान बड़े प्यार से उसे समझाते हुए बताते हैं | Moral Stories In Hindi For Class 5 

आपको पता है मंदिर के रास्ते में एक ईंट का टुकड़ा रह गया था मैं इधर बहुत दिनों से अपने घर के

सामने से देखता था कि ईंट के टुकड़े की नोक से लोगों को ठोकर लगती थी लोग गिरते थे लुढ़कते थे और उठकर चले जाते थे |

आपको उस टुकड़े से ठोकर नहीं लगी लेकिन जब आपने उसे देखा और देखते ही उसे निकाल

देने की कोशिश की मैं देख रहा था कि आप मेरे मजदूर  से फावड़ा मांग कर ले गए और

उस टुकड़े को खोदकर अपने हर रास्ते में पड़े कांटे कंकर और ठोकर लगने वाले पत्थर और ईंटों को तो हटा दिया |

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ऐसा करना  हर इंसान का कर्तव्य होता है जानते तो सब है कि उन्हें क्या करना चाहिए

लेकिन करते बहुत कम लोग हैं आपकी यही क्वालिटी देखकर मैं चाहता हूं कि इस मंदिर का मैनेजमेंट आप करें |

आप लोगों ने देखा न कैसे वह व्यक्ति  कोई लंबा चौड़ा एक्सपीरियंस हुए बिना उसे मंदिर का मैनेजर बन गया |

नोट – दोस्तों यही चीज हमारी जिंदगी पर भी  लागू होती है | अगर हम लोगों के सामने

किसी रास्ते पर या कहीं कोई चीज लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली पड़ी है तो हम लोगों

का  कर्तव्य है कि उसको हटा दिया जाय |

Moral Stories In Hindi For Class 5

कहानी 3  बुध्दिमान व्यक्ति की परख 

एक राजा का बड़ा सा दरबार लगा हुआ था क्योंकि सर्दी का दिन था पूरी आम सभा सुबह की

धूप में बैठी थी महाराज के सिंहासन के सामने एक टेबल जैसी कोई कीमती चीज रखी थी

पंडित लोग दीवान आदि सभी दरबार में बैठे हुए थे

राजा के परिवार के मेंबर्स भी  बैठे हुए थे उसी समय राजा को कोई सूचना देता है कि

आपसे कोई मिलना चाहता है राजा ने आज्ञा दी हां जी मिलवाइए है उस व्यक्ति ने आते

ही बोला महाराज मेरे पास दो चीज हैं

और मैं हर राज्य के राजा के पास जाता हूं अपनी बात उनके सामने रखता हूं कोई परख नहीं

पाता  मेरी इस बात को और मैं विजेता बनकर घूम रहा हूं और अब मैं आपकी नगर  में आया हूं

राजा ने बुलाया और कहा क्या बात है

तो उसने दोनों चीजें टेबल पर रख दी बिल्कुल एक जैसे साइज की एक जैसे कलर की सब कुछ

एक जैसे लेकिन इस पर उसने कहा महाराज यह दोनों चीजें  दिखती तो एक जैसी है लेकिन यह है

अलग-अलग इनमें से एक बहुत कीमती हीरा है और एक है कांच का टुकड़ा पर आज तक इन

दोनों चीजों को कोई परख  नहीं पाया है कि कौन सा हीरा है

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और कौन सा शिशा अगर परख खरी  निकली तो मैं हार जाऊंगा और यह कीमती हीरा मैं आपके राज्य

के तिजोरी में जमा करवा दूंगा लेकिन अगर कोई पहचान नहीं पाया तो जो इस हीरे की कीमत है

Moral Stories In Hindi For Class 5 || हीरा और काँच का परख

उतनी राशि आपको मुझे देनी होगी इस तरह मैं  कई राज्यों में जीतता आया हूं यह बात

सुनकर राजा ने कहा मैं तो नहीं परख  सकूंगा दीवान बोले हम भी परखने  की हिम्मत नहीं कर सकते

क्योंकि दोनों एक जैसे हैं धीरे-धीरे करके राजा के दरबार में सारे लोग हार गए हर किसी ने

पहले से ही अपने घुटने टेक दिए कि यह हमारे बस की बात नहीं है 

और कारण भी था अगर हार जाते तो पैसे देने पड़ेंगे उसका तो कोई सवाल नहीं क्योंकि राजा

के पास धन तो बहुत था पर राजा की प्रतिष्ठा गिर जाती इसका हर किसी को डर था

आखिरकार थोड़ा सा इंतजार करने पर एक व्यक्ति आया जो कि अपनी आंखों से देखा नहीं सकता था

हाथ में लाठी लेकर उठा और उसने कहा मुझे महाराज के पास ले चलिए मैं यह सब बातें सुनी है

और यह भी सुना है कि अभी तक इन दोनों चीजों को कोई परख  नहीं पा रहा एक अवसर  मुझे भी देंगे

क्या एक आदमी के सहारे वह व्यक्ति राजा के पास पहुंचा उसने राजा से प्रार्थना कि मैं तो जन्म से देख भी नहीं सकता पर फिर भी मैं चाहता हूं

कि आप मुझे एक मौका जरूर दीजिए जिससे मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूँ   हो सकता है कि मैं सफल हो जाऊं और यदि सफल न हुआ तो वैसे भी आप तो हारे  ही है ना उसकी बात सुनकर राजा को लगा आखिर एक मौका देने में तो कोई बुराई नहीं है राजा ने कहा ठीक है

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तो उस व्यक्ति ने उन दोनों चीजों को छुआ  और छूने के 1 मिनट बाद उसने कहा यह हीरा है और यह काँच जो व्यक्ति इतने सारे राज्यों को जीत कर आया था वह नतमस्तक हो गया और बोला हुजूर इन्होंने एकदम सही जवाब दिया है

आपने पहचान लिया धन्य है आप अपने वचन के मुताबिक यह हीरा मैं आपके राज्य की तिजोरी में दे रहा हूं पूरे दरबार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी राजा भी बहुत खुश और वह व्यक्ति भी बहुत खुश लेकिन राजा और बाकी लोगों के मन में एक सवाल था

कि जिस बात का पता इतने सारे राज्यों में और यहां तक की इस राजा के राज्य में भी बड़े से बड़े धुरंधर बैठे थे उनके दिमाग में नहीं आया तो कैसे एक व्यक्ति जिसके पास आंखें भी  नहीं है उसने इस बात के बारे में पता लगा लिया कि कौन सा हीरा है

और कौन सा कांच इस पर उस व्यक्ति ने कहा जो कि अपनी आंखों से देख नहीं पाता था महाराज मैंने ज्यादा नहीं सोचा सीधी सी बात है हम धूप में बैठे हुए थे मैंने दोनों को छुआ तो जो ठंडा रहा वह हीरा था और जो गर्म हो गया था वह था काँच |

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