Moral Stories In Hindi For Class 7 || रोचक और ज्ञानवर्धक कहानियाँ

Moral Stories In Hindi For Class 7

बगल में छोरा नगर ढिढोरा ,Moral Stories In Hindi For Class 7

एक पंडित जी थे उनके पास एक मोटी ताजा, दूध देने वाली गाय थी |यह गाय  किसी ने उन्हें दान में दी थी |

और गाय के कारण घर में दूध दही इन सब चीजों की कोई कमी नहीं होती थी और मतलब यह था

कि पंडित जी मोटे ताजे होते जा रहे थे |

Moral Stories In Hindi For Class 7

एक शाम की बात है पंडित जी दूध दुने गाय के गवसाला मे पहुंचे |तो गाय वहाँ से गायब मिली

खूटा भी उखड़ा हुआ था पंडित जी की जैसे जान ही सुख गई उन्होने सोचा हो ना हो गाय कहीं

निकल भागी है| गाय  उन्हें प्यारी इतनी थी फ़ोरन ढुढने निकल पड़े थोड़ी दूर पर एक गाय चरती

हुई दिखाई दी |ओ खुस हो गए लेकिन शाम का वक्त हो रहा था |ओ जान नहीं पाए की जिस

गाय को वह अपनी गाय समझ रहें है ओ तो पड़ोसी का मरखना साढ़ है उन्होने लपकर जैसे ही

उसकी रस्सी पकडी साढ़ भढक गया जब  तक की सारी बात समझ मे आती – आपकी इस्माइल

बता  रही है की आप भी समझ गए है कि देर हो चुकी थी  |सांढ हुंकारता हुआ उनके पीछे दौड़

पड़ा और भारी भरकम  शरीर वाले पंडित जी हाँफते  -हाँफते ,गिरते परते भाग  खड़े हुए |

भागते भागते उनका दम निकला जा रहा था और साड़ था की मानने  को तैयार ही  नहीं  था

आखिरकार  एक गड्डा देखकर पंडित जी उसमें धड़ाम से  कूद पड़े |साड़ फिर भी नहीं माना

पीछे पीछे उसमे ओ भी उतर पड़ा पंडित जी फिर भागे अबकी बार उन्हें भूसे का एक ढेर दिखा

पंडित जी उस पर  कूद पड़े और  दम साध  कर उसी मे पड़े रहे साढ़ ने भुंसे के एक दो चक्कर

रोचक और ज्ञानवर्धक कहानी इन हिन्दी,Moral Stories In Hindi For Class 7

लगाए थोड़ी देर ठहर कर इधर उधर उन्हे ढुड़ा फिर  वापस चला गया भुंसे के ढेर  से पंडित जी

वापस आए तो उनका पूरा का पूरा रूप ही बदल चुका था |

पूरे शरीर पर भुंसा चिपका हुआ था | Moral Stories In Hindi For Class 7

जैसे मालूम हो रहा था दूसरे गृह के  एलिएन नजर आ रहे थे तभी उधर से गुजरते हुए एक आदमी

की  उनपर  नजर पड़ी और वह डरकर चीख उठा उसकी चीख  सुनकर 10 ,20 आदमी और आगए

उसकी मदद को ,आगे आगे पंडित जी और पीछे-पीछे सारे लोग वह चीखते रहे भाइयों मैं  पंडित जी

पर लोगों ने नहीं सुनी आखिरकार बचने का  एक ही सॉल्यूशन देखकर पंडित जी एक तालाब में कूद पड़े

उनके शरीर से भूसा छूटा तो लोग हैरान रह गए जब सारे लोगों को उनकी राम कहानी मालूम हुई तो सारे

अपने घरों को वापस लौट गए |

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पर अभी तक पंडित जी के दिमाग से अपनी गाय तो निकली नहीं थी |अपनी गाय को को ढूंढते ढूंढते वह

और आगे बढे गांव के बाहर आम के बाग थे  गाय  चरती  हुई अक्सर वहां पर चली जाती थी तो पंडित जी

ने सोचा कि शायद मेरी गाय  वहां पर आ गई है  उन दिनों आम पकने लगे थे और उस आम के बाग में

जो केयरटेकर थे उन्होंने वहीं पर अपनी छोटी सी एक झोपड़ी बनाई हुई थी और वहां पर रहकर उसकी

वह केयर करते थे पंडित जी ने जैसे ही उस आम के बगीचे में कदम रखा मालिक की नजर पड़ गयी उसे

लगा कोई चोर है  और बस जी उसने न आव देखा न ताव एक मोटा सा लठ उठाया और बस  पंडित जी

पर दे दना दन जैसे तैसे पंडित जी जान अपनी छुड़ाकर वहां से निकले और भागते-भागते वह एक खेत में

जा पहुंचे खेत में खरबूजे  और ककरिया लगी हुई थी खेत के रखवाले ने गोल मटोल पंडित जी को देखा तो

समझा कोई जानवर घुस  आया बस फिर क्या था वह भी अपनी लाठी और जलती मशाल लेकर उनके पीछे

लपक गया अब पंडित जी का धैर्य  जवाब दे गया इस बार वह भागे  और सीधा जाकर अपने घर पर रुके

उनकी हालत देखकर पंडिताइन ने पूछा क्यों जी कहां से आ रहे हो पंडित जी हाँफते  हुए बोले मैं गाय की

खोज में पागल हो गया हूं और तुम पूछती हो कहां से आ रहे हो |

पंडिताइन बोलीं गाय की खोज गाय तो

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घर के पीछे बंधी है गौशाला का खूंटा  उखड़ गया था इसलिए मैं गाय को घर के पीछे जाकर बांध दिया था|

पंडिताइन की यह बात सुनकर पंडित जी ने अपना सिर पीट  लिया बताइए आपको नहीं लगता अपने घर

से निकलने से पहले सिर्फ एक ही तो सवाल करना था पंडिताइन  से क्या तुमने अपनी गाय को देखा कहीं ?

बगल में छोरा नगर ढिढोरा इसी को कहते हैं |

दो घड़ों की कहानी ,Moral Stories In Hindi For Class 7

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बहुत समय पहले की बात है ,किसी गांव में एक किसान रहता था वह रोज सुबह-सुबह उठकर

दूर झरनों सेसाफ पानी लेने जाया करता था | और इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े

ले जाता था |जिसे अपने कंधों पर दोनों तरफ से लटका लेता था |उसमें से एक घड़ा कहीं से फूटा

हुआ था और दूसरा  एकदम सही सलामत था |इसी वजह से रोज घर पहुँचते पहुँचते किसान के

पास डेढ़ घड़ा पानी ही बचता  था | ऐसा काफी समय तक चलता रहा |जो घड़ा इकदम सही

सलामत  था उसे इस बात का बहुत फक्र था की ओ पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता था |

उसके अंदर किसी प्रकार की कमी नहीं थी | वहीं दूसरी तरफ फूटा हुआ घड़ा इस बात

से हमेशा शर्मिन्दा रहता  था की वह आधा पानी ही पहुंचा पाता | किसान की मेहनत बेकार

चली जाती थी फूटाघड़ा बहुत परेसान रहने लगा  था  |वह सोचता था दूसरा घड़ा   पूरा का

पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अंदर किसी भी चीज की कमी नहीं है| इस बात से

हमेशा शर्मिंदा रहता था कि वह आधा पानी ही घर पर पहुंचा  पाता है |और किसान की

मेहनत बेकार चली जाती है | वह बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उसे रहा नहीं गया

उसने किसान से कहा मैं खुद पर बहुत शर्मिंदा हूं और मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूं

इस बात पर मैं  शर्मिंदा हूँ  आप जानते नहीं हो मैं एक जगह से फूटा हुआ हूं अब पिछले

दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुंचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंच पाता  मेरे

अंदर यह बहुत बड़ी कमी है| और इसी वजह से आपकी काफी मेहनत बर्बाद होती रही है

फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा | किसान को घड़े की बात

रोचक और शिक्षापर्द कहानी ,Moral Stories In Hindi For Class 7

सुनकर थोड़ा दुख हुआ कोई बात नहीं मैं चाहता हूं कि आज वापस आते हुए तुम रास्ते में

पड़ने  वाले सुंदर फूलों को देखो घड़े ने वैसा ही किया फूल को देखता ही आया ऐसा करने

से उसकी कुछ उदासी  दूर हुई ही पर घर पहुँचते पहुँचते फिर से  उसके अंदर से आधा

पानी गिर चुका था और किसान से माफी मागने लगा था | किसान बोला सायद तुमने ध्यान

नही दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे ना वह बस तुम्हारी तरफ ही थे सही घड़े

की तरफ एक भी फूल नहीं था |

Moral Stories In Hindi For Class 7

और ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अंदर की कमी को जानता था पर मैंने

उस बात का नुकसान नहीं उठाया बल्कि मैंने उससे फायदा ही लिया मैंने तुम्हारी तरफ

वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे थोड़ा थोड़ा करके तुम उन्हे सींचते  रहे

पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया आज तुम्हारी वजह से ही भगवान को अर्पित कर

पता और अपना घर सुंदर बना पाता आज तुम्हारी वजह से ही ए बंजर रास्ता खूबसूरत रास्ता

हो गया  अब वे हरा भरा फूलो का बगीचा बन गया अब बताओ तुम वैसे नहीं

होते तो मै ऐसा कर पाता |

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चिड़िया और बंदर (ज्ञान उसी को दें जो समझ सके )Moral Stories In Hindi For Class 7

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एक छोटी सी कहानी सुंदरबन में ठंड दस्तक दे रही थी| सभी जानवर आगे आने वाले मौसम के लिए

तैयारी करने में लगे हुए थे |चुनमुन चिड़िया उनमे से एक  थी हर साल की तरह उसने अपने लिए बहुत

ही सुंदर सा घोषला तैयार किया था |और अचानक होने वाली बारिश और ठंड से बचने के लिए उसे

चारों तरफ से घास फूस  से ढक दिया था |सब  कुछ ठीक चल रहा था एक दिन अचानक ही  बिजली

कड़कने लगी और देखते ही देखते भारी बारिश होने लगी बे मौसम आए बारिश से ठंड भी बढ़ गयी |

और सभी जानवर अपने-अपने घरों की तरफ भागने लगे चुनमुन भी तेजी दिखाते हुये अपने घोषले मे

वापस आ गयी | और आराम करने लगी उसे आए हुए बस थोड़ा ही टाइम हुआ था की  एक बंदर खुद

को बचाने के लिए पेड़ के नीचे आ पहुंचा| चुनमुन ने बंदर को देखा और कहा  तुम इतने होशियार बने

फिरते हो भला ऐसे मौसम से बचने के लिए घर क्यों नहीं बनाया यह सुनकर बंदर को गुस्सा आ गया

लेकिन वह चुप ही रहा और पेड़ की आड़ में खुद को बचाने की कोशिश करने लगा |थोड़ी देर चुप रहने

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के बाद चुनमुन फिर बोली पूरी गर्मी इधर -उधर घूमकर  आलस में बिता दि अच्छा होता अपने लिए घर

बना लेते यह सुन बंदर ने गुस्से में कहा तुम अपने मतलब से मतलब रखो मेरी चिंता छोड़ दो चुनमुन

शांत हो गयी |बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी हवाएँ भी तेज चल रही थी बेचारा बंदर

ठंड से काँप  रहा था और खुद को ढकने की बहुत कोशिश कर रहा था|

पर चुनमुन ने मानो उसे छेड़ने

कहानी  चिड़िया की, Moral Stories In Hindi For Class 7

की कसम खा रखी थी फिर बोली  काश  तुमने थोड़ी सी अकल दिखाई होती तो आज यह हालत  चुनमुन

ने अभी अपनी बात खत्म भी  नहीं की थी कि बंदर बौखलाते हुये  बोला एकदम चुप अपना यह बार-बार

फुसफुसाना  बंद करो ज्ञान की बातें अपने पास रखो चुनमुन चुप हो गयी थी |

अबतक काफी पानी गिरचुका था | Moral Stories In Hindi For Class 7

जबतक कोई आप से सलाह न मांगे तो उसको सलाह नहीं देना चाहिए Moral Stories In Hindi For Class 7

बंदर बिलकुल भीग चुका था और पूरी तरह ठंड से काँप रहा था |इतने मे चुनमुन से रहा ही नहीं

गया और वह फिर बोल उठी कम से कम अब अपना घर बनाना सीख ले , बस फिर क्या था इतना सुनते

ही बंदर उस पेड़ पर चढ़ने लगा और कहा भले मैं घर बनाना नहीं जनता परंतु घर उजाड़ना तो जनता हूँ

यह कहते हुये उसने चुनमुन का घोंशला तहस -नहस कर दिया और चुनमून भी बंदर की तरह ही बेघर

हो चुकी थी और ठंड से कांप रही थी कहने  का मतलब अगले इंसान को एडवाइस दें लेकिन सोच समझकर

और उससे भी बड़ी बात लिमिट में | Moral Stories In Hindi For Class 7

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मेहनत और विश्वाश की कहानी ,Moral Stories In Hindi For Class 7

किसी गाँव में एक साधू रहा करता था | कहते हैं वह जब भी नाचता तो बारिश होती थी |इसलिए गाँव वालों को

जब भी बारिश की जरूरत होती थी | तो वह लोग साधू के पास जाते और प्रार्थना करते की साधू जी नाचिए

जब वह नाचने लगते तो बारिश होने लगती कुछ दिनों बाद शहर से गाँव में घूमने आए जब उन्हें यह बात मालूम हुई

कि किसी साधू के नाचने से बारिश होती है तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ अब शहर के पढे -लिखे उन

बच्चों के दिमाग मे घमंड था उन्होने गाँव वालों को चुनौती दी कि हम भी नाचेंगे तो बारिश होगी और अगर हमारे

नाचने सेबारिश नहीं हुई तो उस साधू के नाचने से भी नहीं होगी फिर क्या था  अगले दिन सुबह-सुबह ही गांव वाले

उन लड़कों को लेकरसाधु की कुटिया पर पहुंच गए साधु को सारी बात बताइ गयी  फिर लड़कों ने नाचना शुरू

किया आधा घंटा बीत गया पहला लड़का थक गयाबादल नहीं दिखे कुछ देर तक दूसरा वाला नाचता  रहा फिर वह

भी थक गया धीरे-धीरे सारे लड़के थक गए और बैठ गए औरबारिश नहीं हुई अब साधू की बारी थी उसने नाचना सुरू

किया  एक घंटा बीता बारिश नहीं हुई साधू नाचता रहा दो घंटे बीते  बारिश नहीं हुईपर साधु तो रुकने का नाम ही

नहीं ले रहा था धीरे-धीरे शाम ढलने लगी तभी बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दी और ज़ोरों की

बारिश होने लगी लड़के हैरान रह गए |

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Moral Stories In Hindi

विश्वास इसी को कहते हैं, Moral Stories In Hindi For Class 7

और तुरंत उन्होने उस साधू से माफी मांगी और पूछा बाबा भला ऐसा क्यों हुआ कि

हमारे नाचने से बारिश नहीं हुई और आपके नाचने से बारिश होने लगी साधू ने जवाब दिया जब मैं नाचता हूँ तो

दो बातों का ख्याल रखता हूँ पहली बात मैं यह सोंचता हूँ कि जब मैं नचुंगा तो बारिश को होना ही पड़ेगा और

दूसरी बात तब तकमैं नचुंगा जबतक की बारिश न हो जाय |

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