Positive Thinking In Hindi || सकारात्मक सोच

Positive Thinking In Hindi

Positive Thinking In Hindi

नमस्कार दोस्तों मैंने इस पोस्ट Positive Thinking In Hindi में आप लोगों को सकरात्मक सोच के बारे में बताऊंगा

हम लोगों के  सामने मौजूद किसी भी चीज  से ज्यादा महत्वपूर्ण उस चीज  के बारे में हमारा नजरिया होता है, क्योंकि हम लोगों की  सफलता याअसफलता उसी से तय होती है /

– नार्मन विमेंट पीले

हम बचपन में जो भी नजरिया अपनाते हैं वो उम्र भर हमारे साथ रहता है | इसमे कोई शक नहीं की बचपन में हमारे लिए सकारत्मक

नजरिया बनाना बेहद आसान होता है |

अगर पैदाइशी मिजाज और बचपन के तजरबे के मेल से आपका नजरिया सकारात्मक बन

गया है तो हम  खुशकिश्मत है लेकिन जानबूझ कर या हालात की वजह से हमारा नजरिया नकारात्मक बन गया हो तो क्या हम

उससे चिपके रहेंगे?

Sakratmak Soch

बिलकुल नहीं क्या यह करने लायक है यक़ीनन हम सकारात्मक नजरिया कैसे बना और बरकरार रख सकते है इसके लिए हमको

सकारात्मक नजरिया बनाने के उसूलों से वाकिफ होना होगा |

सकारात्मक नजरिया अपनाने के लिए  मन में  इच्छा पैदा करनी होगी |और  इन

उसूलों को अमल में लाने के लिए अनुशासित ( desciplined ) तथा निष्ठ ( dedicated ) होना होगा |       

Sakratmak Mahoul

हमें किसी प्रकार का  माहौल ,शिक्षा , समाज और तजुर्बा  मिला हो लेकिन  बड़े होने के बाद हमारे नजरिए के लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं  ?

खुद हम | हमें अपने व्यवहार

और कामो की जिम्मेदारी कबुल करनी होगी |

कुछ लोग किसी गलती के लिए खुद को छोड़ कर बाकि सभी लोगों को दोषी ठहराते

हैं | यह हम पर निर्भर करता है की हर सुबह हम अपना नजरिया खुद चुने |

नकारात्मक नजरिए वाले लोग अपनी असफलताओ के

लिए अकसर माँ – बाप शिक्षक जिवनशाथी बॉस सितारों तकदीर आर्थिक स्थितियों और सरकार यानि पूरी दुनिया को जिम्मेदार

ठहराते रहते हैं |

हमको अपने बीते दिनों से आजाद होना होगा | हमें अपनी शख्सियत पर जमी धुल को झाड़कर मुख्य धारा में

शामिल होना होगा | हमें अपने संपनो की एक मुकमिम्ल तस्वीर बना कर आगे बढ़ना होगा |

सच्चाई इमानदारी और अच्छाई से जुडी

चीजो के बारे में सोचने से हमारी सोच सकारात्मक हो जाएगी | 

नजरिया बदलने का तरीका | Positive Thinking In Hindi

अगर हम सकारात्मक नजरिया बनाना और कायम रखना चाहते हैं तो हमको सवाधानिपुर्क ये कदम उठाने पड़ेंगे –

.पहला कदम – अपनी सोच बदलने और अच्छाई खोजें

हमें अच्छी चीजो का खोजी बनना पड़ेगा | हमें जिंदगी के सकारात्मक पहलू पर ध्यान देना होगा |

किसी इन्सान या किसी हालात के

उसके बुरे व्यवहार  के बजाए उसके अच्छे व्यवहार  पर गौर करना चालू  करें |

हममें से ज्यादातर लोगो को अपनी हो सोच का माहौल इस ढंग से

ढाल देता है की हम गलतिया और कमियों को ढूढने के आदि हो चुके होते है

और इसलिए तस्वीर का अच्छा पहलू अनदेखा रह जाता है |

सोने की तलाश ,में 

दोस्तों सोने को खोजना आसान नहीं होता है बहुत ही कठिन है 

एंड्रयू कार्नेगी अपने बचपन के दिनों में ही स्काटलैंड से अमरीका चले गए |

उन्होंने  बहुत ही छोटे – मोटे काम से काम चालू की  और

मेहनत करते हुए  अमरीका में स्टील बनाने वाली मालिक बन गए सबसे बड़ी कंपनी का

एक समय ऐसा  आया जब उनके लिए 43 करोड़पति काम करते थे |

करोड़ रुपये इस ज़माने में भी बहुत होते हैं लेकिन सन 1920 के आसपास तो उनकि बहुत ज्यादा कीमत

थी |

लोगों  ने कार्नेगी से पूछताछ की , ” आप लोगो से कैसा व्यवहार करते हैं  हैं ?

तो उन्होंने जवाब दिया – लोगो से पेश आना काफी हद तक सोने की

खुदाई करने जैसा ही है |

हमको एक तोला ( Ounce ) सोना खोद निकालने के लिए कई टन मिटटी हटानी पड़ती है | लेकिन खुदाई

करते वक्त हमारा ध्यान मिटटी पर नहीं बल्कि सोने पर रहता है |

एंड्र्यू कार्नेगी के जवाब में एक बहुत महत्वपूर्ण सन्देश छिपा हुआ

है | हो सकता है की किसी इंसान , या किसी हालात में कोई अच्छी बात साफ तौर पर न दिखाई दे रही हो |

ऐसी हालत में उसे

गहराई में जाकर तलाशना होगा | हमारा मकसद क्या है ? सोना तलाशना |

अगर हम किसी इंसान या किसी चीज में कमियां ढूढेंगे

तो हमको ढेरों कमियां दिखाई देंगी | लेकिन हमें  किस चीज की तलाश है – सोने की या मिटटी की ? कमियां ढूढने वाले तो स्वर्ग में

भी कमियां निकाल देंगे | अधिकतर लोगो को वही मिलता है जिसकी उन्हें तलाश होती है | 

सकारात्मक नजरिया , Positive Thinking In Hindi

कुछ लोग ऐसे हैं जो हमेशा किसी व्यक्ति में नकरात्मक  पहलू को ही  देखते है

नकारात्मक नजरिए वाले लोग हमेशा नुक्स निकालते है

कुछ लोग हर चीज में नुक्स निकालते है |

कोई काम भले ही बहुत अच्छी तरह किया गया हो पर उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता |

ऐसे लोगो ने नुक्स निकालने को ही अपना पेशा बना लिया है |

वे पेशेवर आलोचक  है | वे इस तरह नुक्श निकाला

करते हैं जैसे की उन्हें इसके लिए किसी चीज का   इनाम मिलने वाला हो |

वह किसी भी   इंसान में और किसी भी  हालात में कोई – न –

कोई नुक्स ढूंढ ही निकालेंगे | हमें ऐसे लोग हर दफ्तर और हर परिवार में मिल जाएंगे |

वे चारो ओर कमियां ढूढते और यह बताते

फिरते है की चींजे कितनी बुरी है |

वे अपनी समस्याओ के लिए पूरी दुनिया को दोषी मानते है | ये लोग दूसरे के जोश पर पानी फेर

देते है ऐसे लोगो के लिए एक नाम है |

ये लोग किसी के भी ताकत को चूस लेते हैं  | ऐसे लोग किसी होटल  में जाकर

बीसियों कप चाय पिएंगे सिगरेट के लंबे – लंबे कश खिचंगे और यह सब करने का उनके पास केवल एक बहाना रहता है की वे

अपने तनाव को दूर कर रहें है |

हकीकत यह है की ऐसा करके वे खुद के लिए और दुसरो के लिए तनाव और बढ़ा देते हैं | वे प्लेग

की बीमारी की तरह हर तरफ मायूसी का पैगाम फैलाते है और ऐसा माहौल पैदा करते हैं जिसके नतीजे बुरे या गलत हों

Samanya Gyan

Positive Thinking In Hindi की कहानी 

राबर्ट फुल्टन ( Robert Fulton ) ने स्टीमबोट की आविष्कार की |

हडसन नदी के किनारे उन्होंने उसका प्रद्रशन किया | उसे देखने के

लिए लगी हुई  भीड़ में कुछ निराशा वादी और शक्की किस्म  के लोग भी शामिल थे |

उन लोगो ने मजाकिया लहजे में बोला की वह

बोट कभी चालू नहीं होगी | जब बोट चालू हो  गई तो  वही लोग फ़ौरन चिल्लाने लगे की बोट अब कभी नहीं रुकेगी |

यह भी क्या नजरिया है

एक शिकारी  चिड़ियों को पकड़ने  के लिए एक  अदभुत कुत्ता ख़रीदा | वह ऐसा कुत्ता था जो  पानी पर चल सकता था |

शिकारी वह कुत्ता अपने

दोस्तों को दिखाना चाहता था |

उसे इस बात की बड़ी ख़ुशी थी की वह अपने एक दोस्त को बत्तख का शिकार देखने के लिए बुलाया |

कुछ देर में उन्होंने कई बत्तखों को बुंदक से मर गिराया |

उसके बाद उस आदमी ने कुत्ते को उन चिडियो को लाने का हुक्म दिया |

कुत्ता चिडियो के लेने के लिए पानी पर दौड़ पड़ा |

उस आदमी को उम्मींद थी की उसका दोस्त कुत्ते के बारे कुछ कहेगा या उसकी

तारीफ करेगा लेकिन उसका दोस्त कुछ नहीं बोला | घर लौटते समय उसने अपने दोस्त से पूछा की क्या उसने कुत्ते में कोई खास

बात देखि | दोस्त ने जवाब दिया हाँ मैंने उसमें एक खास बात देखीं | तुम्हारा कुत्ता तैर नहीं सकता |

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